Mission & Vision

MISSION

  चोरहार्यं राजहार्यंन भ्रातृभाज्यं भारकारी व्यये कृते वर्धते एव नित्यं विद्याधनं सर्वधन प्रधानम्

 भावार्थविद्यारुपी धन को कोई चुरा नहीं सकता, राजा ले नहीं सकता, भाईयों में उसका भाग नहीं होता, उसका भार नहीं लगता, (और) खर्च करने से बढता है सचमुच, विद्यारुप धन सर्वश्रेष्ठ है

“Education is a wealth that can neither be robbed off by the thieves, nor taken by any king; it cannot be divided among the brothers, nor one feels the burden rather it increases on utilization. Truly, Education is the greatest wealth of the world.” 

VISION

सा विद्या या विमुक्तये

भावार्थविद्या वह है कि जो मुक्ति प्रदान करे। जिसके द्वारा हम रोग, शोक, द्वेष, पाप, दीनता, दासता, गरीबी, बेकारी, अभाव, अज्ञान, दुर्गुण, कुसंस्कार आदि की दासता से मुक्ति प्राप्त कर सकें वह विद्या है। ऐसी विद्या को प्राप्त करने वाले विद्वान कहे जाते हैं।

“Knowledge liberates from all that gives us disease, sadness, sin, poverty, slavery, unemployment, penury, ignorance, amorality. The learned is one acquires it by education.”